नया घर

28 अगस्त, 2010

अंग्रेज चले गये ?


अंग्रेज चले गये ?विनोद पाराशर

अंग्रेज चले गये
अब हम आजाद हॆं
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दादाजी ने कहा
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पिता ने भी कहा
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मां ने समझाया
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भाई ने फटकारा
लेकिन वह-
चुप रहा।
दादाजी ने-
घर पर/ दिन-भर
अंग्रेजी का अखबार पढा।
पिता ने-
दफ्तर में/चपरासी को
अंग्रेजी में फटकारा।
मां ने-
स्कूल में/भारत का इतिहास
अंग्रेजी में पढाया।
भाई ने-
खादी-भंडार के
दघाटन-समारोह में
विलायती सूट पहनकर
खादी का महत्व समझाया।
ऒर-
उसने कहा-थूं
सब बकवास हॆ।
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2 टिप्‍पणियां:


  1. बेहतरीन पोस्ट लेखन के बधाई
    ब्लाग जगत में आपका स्वागत है
    आशा है कि अपने सार्थक लेखन से ब्लाग जगत को समृद्ध करेंगे।

    आपकी पोस्ट की चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है-पधारें

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  2. ललित जी,
    उत्साहवर्धन के लिए धन्यवाद.ब्लाग4 वार्ता पर,चर्चा के लिस इस ब्लाग को भी चुना गया-मेरा प्रयास सार्थक हुआ.आप जॆसे मित्रों से इसी तरह के सहयोग की अपेक्षा हॆ.

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